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राय: मिस्टर चिदम्बरम! भूल गये वोह दिन जब कभी बेगुनाह मुसलमानों की फरियाद सुनने का वक्त आप के पास नहि होता था?

राय: मिस्टर चिदम्बरम! भूल गये वोह दिन जब कभी बेगुनाह मुसलमानों की फरियाद सुनने का वक्त आप के पास नहि होता था? - Truth Arrived News Hindi
लेखक: आसिफ शेख

कल चिदम्बरम साहब की प्रेस कॉन्फ्रेंस और उसके बाद उनकी गिरफ्तारी देखी तो बटला हाऊस इनकाउंटर की याद आ गयी। बटला एनकाउंटर के कुछ दिन बाद जंतर मंतर, दिल्ली पे ओलमाकौंसिल ने मुल्क भर से हज़ारों लोगों को एक इकठ्ठा कर एक विशाल धरना दिया था जिसमे आज़मगढ़-जौनपुर से भी एक पूरी ट्रेन रिज़र्व करके लोग अवैध गिरफ्तारी, न्यायिक जांच और मुल्क भर में मुसलमानो को दहशत के साये में झोंकने के खिलाफ प्रदर्शन करने पहुंचे थे, कार्यक्रम के बाद जब मांगों का ज्ञापन देने की बात आई तो  मौलाना आमिर रशादी साहब ने कहा कि हम ज्ञापन सीधे प्रधानमंत्री या गृह मंत्री को देंगे किसी अफसर को नही।

भीड़ की तादाद और वक्ताओं के तेवर देख प्रशासन ने आनन फानन में गृह मंत्री चिदम्बरम से मुलाक़ात तय कराई और 5 लोगों को मिलने के लिए बुलाया गया जिस पर आपत्ति जताने के बाद लगभग दर्जन भर लोगों का प्रतिनिधिमंडल मिलने पहुंचा। गृह मंत्री ने आते साथ ही कहा कि आपके पास 20 मिनट का समय था जिसमे से 5 मिनट समाप्त हो गए हैं इसलिए जल्दी बताएं क्या कहना है मुझे और भी काम है? मौलाना ने तल्ख लहजे में जवाब देते हुए कहाकि की गर इस देश के गृह मंत्री के पास 20 करोड़ मुसलमानों के लिए 20 मिनट भी नही है तो हमे ऐसे मंत्री और ऐसी हुकूमत से बात नही करनी। इसके बाद पूरी मीटिंग में चिदम्बरम साहब खामोश सुनते रहे, डेलीगेशन ने अपनी पूरी बात रखी, अवैध गिरफ्तारी पे रोक व न्यायिक जांच की मांग के साथ ही मुल्क भर में मुसलमानो के बीच इंडियन मुजाहिदीन के नाम पर पैदा किये गए खौफ व दहशत का माहौल खत्म करने की बात कही जिस पर चिदम्बरम साहब ने बस इतना कहाकि बटला एनकाउंटर की जांच कराने पर सुरक्षा एजेंसियों का मनोबल गिरेगा।

राय: मिस्टर चिदम्बरम! भूल गये वोह दिन जब कभी बेगुनाह मुसलमानों की फरियाद सुनने का वक्त आप के पास नहि होता था? - Truth Arrived News Hindi
आज उसी बढ़े हुए मनोबल के साथ जब वही एजेंसियां उनकी अवैध गिरफ्तारी कर रही हैं तो मुझे चिदम्बरम साहब के दौर मे हमारे उन भाईयों की अवैध गिरफ्तारीयां याद आ गयी जो बेगुनाह होते हुए आज भी गुनाहगार की ज़िंदगी गुज़ार रहे हैं। जब जाँच एजेन्सी के लोग चिदम्बरम साहब के घर मे दिवार फांद कर कूद रहे थे तो मुझे बटला इनकाउंटर के बाद आज़मगढ़ के संजरपुर से लेकर कर्नाटक के भटकल तक इन एजेंसियों के ज़रिए मुसलमानो के घरों की कूदी हुई दिवारें और टूटे हुए दरवाज़े याद आ गए। 

आज प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब चिदम्बरम साहब अपने बचाव में संविधान के ज़रिये दिए गए मौलिक अधिकार "Right to Life & Liberty" की बात कर रहे थे तो मुझे मुसलमानों की "Life & Liberty" की याद आ गयी जो हम उन्हें मीटिंग में याद दिला रहे थे पर चिदम्बरम साहब को उस वक़्त नही याद थी क्योंकि तब वो सत्ता के नशे में चूर थे। वो PC में कह रहे थे कि पहले जांच करा ली जाए फिर मुझे दोषी ठहराया जाए, हमने भी यही कहा था कि पहले जांच करा ली जाए पर वो कहां मानने वाले थे। आज वक़्त का पहिया घूमा है और चिदम्बरम साहब को संविधान, संघर्ष, आज़ादी, इंसाफ, जीने का अधिकार सब याद आ गया जो आज से 10 साल पहले हमारे याद दिलाने पर भी याद नही आ रहा था। सच मे समय बलवान होता है।


Read in English: Mr. Chidambaram! Forgot the days when you did not have time to listen to the complaint of innocent Muslims?

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